भगत सिंह: स्वतंत्रता संग्राम का अमर नायक।

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 भगत सिंह: स्वतंत्रता संग्राम का अमर नायक। भगत सिंह भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के एक प्रमुख और क्रांतिकारी योद्धा थे। उनका जन्म 28 सितंबर 1907 को पंजाब के लायलपुर (अब पाकिस्तान में) स्थित बंगा गाँव में हुआ था। भगत सिंह के परिवार का माहौल भी क्रांतिकारी था, जहाँ उनके पिता किशन सिंह और चाचा अजीत सिंह स्वतंत्रता सेनानी थे। इस वातावरण ने भगत सिंह के विचारों और जीवन पर गहरा प्रभाव डाला। भगत सिंह का बचपन: भगत सिंह, जिन्हें भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के सबसे प्रमुख क्रांतिकारियों में गिना जाता है, का जन्म 28 सितंबर 1907 को पंजाब के लायलपुर जिले के बंगा गाँव (अब पाकिस्तान में) में हुआ था। उनका परिवार एक सिख जाट परिवार था, जो पहले से ही देश की आजादी के लिए संघर्षरत था। भगत सिंह के पिता, किशन सिंह, और चाचा, अजीत सिंह, स्वतंत्रता सेनानी थे और अंग्रेजी सरकार के खिलाफ आंदोलनों में सक्रिय रूप से भाग लेते थे। ऐसे परिवार में जन्म लेने के कारण भगत सिंह का झुकाव भी बचपन से ही देशभक्ति की ओर हो गया। प्रारंभिक जीवन और शिक्षा: भगत सिंह ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा लाहौर के डी.ए.वी. कॉलेज से की, जहाँ उन्हों...

वैदिक गणित : परंपरा और आज।

Vedik ganit

वैदिक गणित एक आधुनिक परंपरा : 

गणित, मानव सभ्यता की विकास की एक महत्वपूर्ण ऊर्जा है। हमारी सामग्री और आधारभूत विज्ञान की तरह, गणित ने विज्ञान और प्रौद्योगिकी में आठवीं शताब्दी तक विकास किया है। इसका श्रेय अलखवारिति, ब्राह्मगुप्त, आर्यभट्ट और भारतीय गणितज्ञों को जाता है, जिन्होंने अपने कार्यों के माध्यम से गणित की दुनिया में महत्वपूर्ण योगदान दिया। वैदिक गणित, इन भारतीय गणितज्ञों की एक महत्वपूर्ण परंपरा है जिसने गणित के विभिन्न क्षेत्रों में आनुवंशिक और अद्भुत गणितीय सूत्रों का विकास किया है।वैदिक गणित का नाम भारतीय संस्कृति से लिया गया है, जो मानव जीवन के प्रत्येक पहलू को स्पर्श करती है। वैदिक संस्कृति में गणित एक महत्वपूर्ण विषय था और इसे विभिन्न कार्यों, सूक्तियों और मन्त्रों के माध्यम से आद्यात्मिक और वैज्ञानिक विचारों के साथ जोड़ा गया था। वैदिक गणित की विशेषता यह है कि इसमें गणितीय सूत्रों को संक्षिप्त और सहज ढंग से प्रस्तुत किया जाता है जिससे छात्रों को गणितीय समस्याओं को हल करने में सहायता मिलती है।वैदिक गणित के एक प्रमुख पहलू में, गुणनखंड का विस्तार है। इसके आधार पर, हम बहुमितीय और व्यवहारिक संख्याओं को गुणा करने के लिए आसान तरीकों का उपयोग कर सकते हैं। उदाहरण के लिए, जब हमें दो संख्याओं का गुणनखंड निकालना होता है जैसे 23 × 45, तो हम संख्याओं को अपनी एकादिक रूप में प्रस्तुत करते हैं और उनके आपसी गुणनखंड को निकालते हैं। इस तरीके से, हम बिना किसी विटामिन और खड़ीस देंगे के बिना संख्या का गुणनखंड प्राप्त कर सकते हैं।वैदिक गणित में द्विगुणित के साथ-साथ त्रिगुणित, वर्गनिकास, घातांक, गणितीय विवर्तन आदि भी हैं। इन सभी गणितीय चरणों में, संख्याओं के माध्यम से वैदिक सूत्रों का उपयोग किया जाता है जो गणितीय विचार को सरल बनाते हैं।

एक और रोचक बात यह है कि वैदिक गणित में दशमलव की जगह बाहरी और आंतरिक नियम का उपयोग किया जाता है। इसमें, एक संख्या को अंकों के बीच संकेतिक रूप में प्रस्तुत किया जाता है जो उसके आंतरिक गुणनखंड को निर्दिष्ट करता है। इसके अलावा, बाहरी नियम आंकड़ों को जोड़ने और घटाने के लिए उपयोग किया जाता है। यह तरीका गणितीय समस्याओं को हल करने के लिए और भी सरल बनाता है।इसके साथ ही, वैदिक गणित की परंपरा में एक महत्वपूर्ण अंश है अनुपात और साझेदारी की गणना। इसका उपयोग प्रशासनिक, व्यावसायिक और आर्थिक मुद्दों को समझने और हल करने के लिए किया जाता है। अनुपात और साझेदारी की गणना के लिए वैदिक सूत्रों का उपयोग करने से हम आसानी से विभिन्न मापनों, अनुसंधानों और विश्लेषणों को कर सकते हैं।इस अद्भुत गणितीय परंपरा का विकास हमें यह दिखाता है कि भारतीय गणितज्ञों ने बहुत पहले ही गणित की विभिन्न शाखाओं का अध्ययन किया था और उन्होंने उसे सरल बनाने के लिए अद्भुत तकनीकों का उपयोग किया था। वैदिक गणित न केवल गणित को सरल और सुलभ बनाता है, बल्कि यह हमें हमारी धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं के साथ जोड़कर एक पूर्णता की अनुभूति दिलाता है।

अधिकांश महत्वपूर्ण शिक्षा प्रणालियों में, हम वैदिक गणित को अद्वितीय और महत्वपूर्ण योगदान के रूप में देख सकते हैं। इसका अध्ययन छात्रों के ब्रेन डेवलपमेंट, लोजिकल तार्किक बनावट और समस्या-समाधान कौशल में सुधार करता है। यह साथ ही साथ उनके अंतर्ज्ञान, स्वतंत्रता सोचने की क्षमता और आंकड़ों की विश्लेषण क्षमता को भी विकसित करता है।समस्त तत्वों को मिलाकर, वैदिक गणित एक महत्वपूर्ण परंपरा है जो गणित के सम्पूर्ण विकास में भारतीय गणितज्ञों की उच्च उपलब्धि को प्रकट करती है। इसका अध्ययन न केवल हमें उनकी योग्यता की प्रशंसा करता है, बल्कि इससे हमें हमारी विरासत की अद्भुतता और महत्वपूर्णता का भी आदर्श मिलता है। वैदिक गणित हमारी पूर्वजों के गणितीय ज्ञान की एक अनमोल बात है और हमें उसे मान्यता देनी चाहिए ताकि हम गणित की विशालता और विभिन्नता को समझ सकें। समाप्ति रूप में, वैदिक गणित हमें न केवल गणित की सुंदरता और गहराई को प्रदर्शित करता है, बल्कि यह हमें अपनी संस्कृति, परंपरा और ज्ञान की महत्वपूर्णता को भी याद दिलाता है। वैदिक गणित के माध्यम से हमें हमारे पूर्वजों के अद्भुत विज्ञान और गणित के सामरिक योगदान की याद दिलानी चाहिए और उसे सरल तरीके से उपयोग करना चाहिए ताकि हमारी नई पीढ़ी इस विरासत का आदान-प्रदान जारी रख सके।

महान गणितज्ञों : 

आर्यभट्ट (Aryabhata): आर्यभट्ट भारतीय गणितज्ञ, ज्योतिषी, एवं खगोलज्ञ थे। उन्होंने गणित के कई क्षेत्रों में अपनी योगदानें दीं। उनका महत्वपूर्ण कार्य "आर्यभट्टीयम" वैदिक गणित पर आधारित था।

ब्रह्मगुप्त (Brahmagupta): ब्रह्मगुप्त भारतीय गणितज्ञ और खगोलज्ञ थे। उन्होंने शून्य (जीरो) के गणितीय महत्व को समझाने वाले कार्य किए थे। उनका महत्वपूर्ण कार्य "ब्रह्मस्फुटसिद्धान्त" गणित और खगोलशास्त्र पर आधारित था।

आर्चिमेडीज (Archimedes): आर्चिमेडीज एक प्राचीन यूनानी गणितज्ञ थे। उन्होंने गणित के कई क्षेत्रों में अपनी योगदानें दीं, जैसे कि ज्यामिति, शून्य, लचीलापन, और अनुक्रमणिका। उनका महत्वपूर्ण कार्य "संगणकीयात्रा" (The Sand Reckoner) था।

लिओनार्डो फिबोनाच्ची (Leonardo Fibonacci): लिओनार्डो फिबोनाच्ची इटालियन गणितज्ञ थे जिन्होंने भारतीय गणितीय पद्धतियों का पश्चात्तापी लोकप्रिय किया। उन्होंने फिबोनाच्ची संख्या प्रणाली को प्रस्तुत किया, जो आगे चलकर गणितीय विज्ञान में महत्वपूर्ण हुई।

कार्ल फ्राइड्रिच गाउस (Carl Friedrich Gauss): कार्ल फ्राइड्रिच गाउस जर्मन गणितज्ञ थे जिन्होंने बहुत सारे गणितीय शास्त्रीय कार्य किए। उन्होंने विभिन्न गणितीय विभाजन और निर्णय सिद्धांतों को विकसित किया। उनका महत्वपूर्ण कार्य "डिस्क्रेट गॉसियन" था।

ये गणितज्ञ अपने क्षेत्र में महानता और योगदान के लिए प्रसिद्ध हुए हैं। हालांकि, यह सूची केवल कुछ मात्र है और गणित के कई और महान विज्ञानियों को शामिल नहीं करती है।

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