गौतम बुद्ध शान्ति दुत।
•गौतम बुद्ध का जन्म : इस पूर्व ५६३
•गौतम बुद्ध का जन्म स्थल : लुंबिनी, नेपाल
•गौतम बुद्ध का निर्वान : इस पूर्व ४८३
•धर्म: बौद्ध धर्म (सनातन धर्म जन्म से)
•गौतम बुद्ध की जीवनसंगिनी : राजकुमारी यशोधरा
•बच्चे का नाम : राहुल ,•पिता : शुद्धोधन,•माता : मायादेवी
गौतम बुद्ध की कहानियां:
राजकुमार सिद्धार्थ (गौतम बुद्ध) दयालु और प्रेमी थे।वे सभी के प्रति दयालु थे,चाहे वो मानव हो या पशु-पक्षी हो। गौतम बुद्ध को राजा शुद्धोधन ने एक आलीशान जिंदगी दी थी, फिर भी गौतमबुद्ध सरलता से रहना पसंद करते थे। वे कभी भी दुसरे लोगो कि समस्या को नजरंदाज नहीं करते थे और हरेक के प्रति सहानुभूति रखते थे।
सिद्धार्थ भलीभाती जानते थे कि उनके आसपास के सभी लोग सुखी नहीं है, सभी के पास कुछ ना कुछ दुःख होता ही है।
•बौद्ध धर्म के संस्थापक महात्मा गौतम बुद्ध के विचारों और से किसी भी व्यक्ति को जीवन में आगे बढ़ने और सफल होने कि प्रेरणा मिलती है। इस कारण से ही हमारे भारत देश समेत दुनिया भर में बौद्ध धर्म को मानने वाले लोग हैं।
अपने जीवन काल में हरेक व्यक्ति सफल होना चाहता है, लेकिन सभी लोग सफल नहीं हो पाता,पर गौतम बुद्ध के विचारों और तर्क से सभी लोगों को हिम्मत नहीं हारने की प्रेरणा देता है और प्रयास करते रहने के लिए हौसला बढ़ाते है।
हरेक पर किसी भी परिस्थिति का सामना हम शांत रहकर केसे कर सकते है,वे उनके विचारों से प्रेरणा मिलती है।
• एक दिन गौतम बुद्ध अपने अनुयायियों के साथ किसी गांव में उपदेश देने जा रहे थे। उस गांव से पहले मार्ग में बहुत सारे गड्ढे खोदे हुए मिले। गौतम बुद्ध के एक शिष्य को उस गड्ढे को देखकर उस बारे में जानने कि जिज्ञासा प्रकट कि, इस तरह गड्ढे का खोदे होने का क्या मतलब है?
गौतम बुद्ध ने अपने शिष्य को उत्तर देते हुए कहा कि थोड़ा खोदने के बाद पानी न मिलने पर दूसरी जगह गड्ढा खोदना शुरू कर दिया उसी कारण अलग अलग गड्ढे खोदने कि जगह किसी एक ही स्थान पर गड्ढा खोदा तो अवश्य उनको पानी की प्राप्ति होती। उस तरह अगर जीवन में सफल होना चाहते है तो अलग अलग प्रयास करने कि जगह एक ही ध्यान के साथ प्रयास किया जायेगा तो अवश्य ही सफलता मिलेगी।
•गौतम बुद्ध कोई उपवन में आराम कर रहे थे और उसी वक्त बच्चों का एक झुंड वहां पर आया और पेड़ पर पत्थर मारकर आम गिराने लगें,एक पत्थर गौतम बुद्ध के सिर पर लगा और सिर में से खून बहने लगा। बुद्ध के आंखों में आंसू आ गए और बच्चों यह देखकर भयभीत हो गए। उन्हें लगा कि अब गौतम बुद्ध उनको डांटेंग। बच्चों ने गौतम बुद्ध के चरणों में गिर कर उनसे माफ़ी मांगने लगे। उनमें से एक बच्चे ने कहा,"हमसे बड़ी भूल हो गई है, मेरी वजह से आपको पत्थर लगा और आपके आंखों में आंसू आ गए"। इस पर गौतम बुद्ध ने कहा कि,"मैं इसलिए दुःखी हुं की तुमने आम के पेड़ पर पत्थर मारा तो पेड़ ने बदलें में तुम्हें मीठे फल दिए, लेकिन मुझे मारने पर मैं तुम्हें सिर्फ भय दे सका। उस से यह बौद्ध मिलता है कि क्रोध की जगह प्रेम से दुसरे का दिल जीतो।
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